Director's 47th Foundation Day Message
इस वर्ष खनिज क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रक्रम एवं प्रौद्योगिकी विकास से संबंधित हमारे कार्य निष्‍पादन में अभूतपूर्व उन्‍नति हुई है । प्रथमत: सीएसआइआर के नोडल संस्‍थान के रूप में आइएमएमटी ने लौह मूल्‍यों की उच्‍चतर पुन:प्राप्ति के लिए निम्‍न श्रेणी के लौह अयस्‍क, सूक्ष्‍मकों और अवपंकों के उपयोग हेतु रणनीति के विकास के लिए नेटवर्क परियोजना के आदेश को निष्‍पादित किया और वर्ष 2020 तक राष्‍ट्रीय इस्‍पात नीति के 200 मैट्रिक टन लौह उत्‍पादन के लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए योगदान दिया । निम्‍न श्रेणी के लौह अयस्‍कों और सूक्ष्‍मकों, अवपंकों का सज्‍जीकरण और निम्‍न श्रेणी के BHQ अयस्‍कों, गुटिकाओं के लिए ब्‍लू डस्‍ट के उपयोग आदि के फ्लोशीट के विकास के क्षेत्र में समन्‍वयित प्रयासों के कारण सफल प्रक्रम विकास एवं नये ज्ञानार्जन संभव हो पाया ।

नेटवर्क परियोजना के अतिरिक्‍त कई अन्‍य सहायता – अनुदान परियोजनाएं भी कार्यान्वित की गईं जिनमें निम्‍नलिखित सम्मिलित हैं :-
  • उच्‍च राख एवं उच्‍च गंधक युक्‍त भारतीय कोयले से स्‍वच्‍छ कोयले के उत्‍पादन के लिए प्रौद्योगिकी
  • निस्‍तप्‍त बाक्‍साइट बनाने के लिए बाक्‍साइट से लौहे का निस्‍कासन
  • हेमाटाइट का विजलन और कायोलिनाइट खनिज का परिक्षेपण
  • सर्वश्री जेएसपीएल, बड़बिल और सर्वश्री टाटा स्‍टील के सीओबी संयंत्र में स्‍तम्‍भ प्‍लवन इकाई का प्रदर्शन


  • अनुसंधान एवं विकास कार्यों में हमारे निवेश से अत्‍यधिक लाभ की प्राप्ति के लिए हमने अपनी रणनीति विकसित की है । शून्‍य या न्‍यूनतम अपशिष्‍ट की अवधारणा को प्रारंभ करना इसका उद्देश्‍य था । शून्‍य अपशिष्‍ट अवधारणा पर आधारित कुशल सज्‍जीकरण तकनीकें 20 से भी अधिक उद्योगों को उपलब्‍ध कराई गई जिनकी सहायता से वे नई संसाधन संयंत्रों की स्‍थापना पर कार्य प्रारंभ किया ।

    उन्‍नत पदार्थ के संसाधन क्षेत्र में हमने प्‍लाज्‍मा संसाधन और पृष्‍ठीय अभियांत्रिकी से संबंधित क्षेत्रों पर ही अपनी गति‍विधियों को समेकित किया । प्‍लाज्‍मा स्‍प्रे कोटिंग सुविधा की संस्‍थापना से प्‍लाज्‍मा संसाधन प्रवर्त्‍तन केन्‍द्र को सुदृढ़ किया गया और पहली बार विभिन्‍न स्‍पेक्‍ट्रमलेखी तकनीकों का उपयोग करके स्‍वयं प्‍लाज्‍मा के अभिलक्षणन पर अपना ध्‍यान केन्द्रित किया । एक नई एवं पर्या-हितैषी प्रौद्योगिकी के रूप में कार्बन रहित लोहे के लिए एक प्रक्रम प्रारंभ किया गया । हाइड्रोजन को उसकी प्‍लाज्‍मा अवस्‍था में उपयोग करके निम्‍न तापमान पर प्रत्‍यक्ष अपचित लौह के उत्‍पादन के लिए यह अत्‍यंत आवश्‍यक है । इस प्रौद्योगिकी के सफलतापूर्वक विकास से लौह उत्‍पादन के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है।

    जैव अभियांत्रिकी क्षेत्र के वैज्ञानिकों ने भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्‍थान, हैदराबाद और कृषि विज्ञान संस्‍थान, कोलकाता के साथ मिलकर शैवालीय तैल की कृषि और अन्‍य महत्‍त्‍वूपर्ण उत्‍पादों पर कार्य किया । आइएमएमटी ने बड़ी संख्‍या में सूक्ष्‍म शैवाल की स्‍क्रीन एवं अनुरक्षण के लिए एक आधान की स्‍थापना की और प्रायोगिक स्‍तर पर सूक्ष्‍मशैवाल की कृषि के लिए एक रेशवे पोंड का निर्माण किया ।

    निष्‍कर्षणीय धातुकर्म ने एक बार पुन: अपना रूप ग्रहण किया है । क्षारीय विलयन में अपशिष्‍ट उत्‍प्रेरक से जिंक की पुन:प्राप्ति के लिए एक नई निक्षालन प्रक्रिया विकसित की गई। इंदिरा गॉंधी परमाणु अनुंसधान केन्‍द्र (आइजीसीएआर),कलपक्‍कम के लिए डायाफ्राम रहित कोशिका विन्‍यास का उपयोग करके रैफीनेट में उपस्थित नैट्रिक अम्‍ल के विनाइट्रीकरण के लिए एक प्रक्रम विकसित किया गया । आइएमएमटी समुद्री संस्‍तर में उपलब्‍ध बहुधात्विक ग्रंथिकाओं से धातु मूल्‍यों के निष्‍कर्षण पर पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के राष्‍ट्रीय स्‍तर के दीर्घ कालीन कार्यक्रम के सहयोगियों में से एक है । बड़े पैमाने पर प्रक्रम के परीक्षण के लिए एक 50 लीटर एचएफएनडीएक्‍स सुविधा का सृजन किया गया । प्राथमिक बैटरियों की निर्मिति में इसके उपयोग के लिए उच्‍च विसर्जन क्षमता के साथ इलेक्‍ट्रोलाइटिक मैंगानीज डाइआक्‍साइड के उत्‍पादन के लिए प्रयोगशाला स्‍तर पर एक प्रक्रिया को बढ़ाया गया और 40 किलोग्राम मैंगानीज धारित पदार्थ के साथ प्रायोगिक संयंत्र में इसका परीक्षण किया गया ।

    कोलायड एवं पदार्थ रसायन विभाग ने ठोस आक्‍साइड ईंधन प्रकोष्‍ठ परीक्षण सुविधा की स्‍थापना की है । ताप उपचार के बाद इलेक्‍ट्रोफो‍रेटिक निक्षेपण तकनीक द्वारा टाइटेनियम मेटल सबस्‍ट्रेट पर हाइड्रोक्‍सीएपाटाइट-टाइटेनिया की एक संकर विलेपन तैयार किया । निक्षेपित HAp की सूक्ष्‍म सरंध्र प्रकृति जैविक ऊत्‍तक आसंजन और क्रम प्रसरण के लिए अनुकूल पाई गई । प्रकाश उत्‍प्रेरक जल विभाजन के लिए विभिन्‍न प्रकार के उत्‍प्रेरक एवं सह-उत्‍प्रेरक संश्‍लेषित किए गए । तदीय समुद्री मानीटरन एवं पूर्वानुमान कार्य प्रगति पर है । इस समय ओडिशा के तटीय एवं मुहाने के पारिस्थितिक तंत्र से पहली बार तीन नये प्राणिप्‍लवक पाये गए । शहरी क्षेत्रों में ओजोन और ऐरोसोल सान्‍द्रण के अभिलेख के लिए वायुमंडलीय ट्रेस गैसों का स्‍थर का मानीटरन किया गया। प्रवृ‍त्ति में परिवर्तन के कारणों का पता लगाया गया । शीत श्‍यानी उड़न राख भवण उत्‍पादों के निर्माण के लिए खनिज बहुधात्विकीकरण प्रक्रिया को सुनिश्चित किया गया । एनटीपीसी और सर्वश्री वेदान्‍त एल्‍युमीनियम लिमिटेड को यह प्रौद्योगिकी प्रदर्शित की गई । सर्वश्री क्रोम कैमिकल्‍स, महाराष्‍ट्र को 50 किलोग्राम बैच स्‍केल पर क्रोम के घुलनशील क्रोमियम के स्थिरीकरण एवं उपचार के लिए एक प्रक्रम प्रदर्शित किया गया । उपचार के उपरांत इस पदार्थ को संमिश्रित सीमेंट के रूप में उपयोग किया जा सकता है ।

    आइएमएमटी की टेराफिल जल परिष्‍करण प्रौद्योगिकी को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा “भारत निर्माण” एवं “जलमणि” कार्यक्रम के अंतर्गत अपनाया गया । मध्‍याह्न भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत आइएमएमटी के बहु ईंधनीय समुदाय आकार के कुक स्‍टोव के कार्य निष्‍पादन मूल्‍यांकन पर प्रायोगिक परियोजना सम्‍पन्‍न हो गई। जीवभार की खपत में कमी, विद्यालयों के आस-पास ज्‍वलन के कारण कार्बन, धुँआ और प्रदूषण को कम करना इस परियोजना का उद्देश्‍य रहा है।

    आइएमएमटी अब विश्‍व के मानचित्र पर एक सुनिश्चित स्‍थान प्राप्‍त कर लिया है क्‍योंकि हमने विदेशों की कई परियोजनाओं को सफलतापूर्वक सम्‍पन्‍न किया है :-
  • Alcoa – USA निस्‍तप्‍त पेटोलियम कोक (सीपीसी) से सूक्ष्‍म जैविक विगंधककीकरण के माध्‍यम से गंधक निस्‍कासन की प्रक्रिया का अध्‍ययन किया गया और Alcoa – USA को 30 किलोग्राम स्केल प्रक्रम प्रदर्शित किया गया ।
  • सर्वश्री आइसीएस-सेनेगल, खनिज संसाधन संयंत्र निरीक्षण एवं इष्‍टतमीकरण
  • लौह अयस्‍क सज्‍जीकरण के लिए जेएसपीएल, बोलिविया और ईसार, जिम्‍बाबवे
  • KIGAM, दक्षिण कोरिया, दुलर्भ मृदा के लिए निष्‍कर्षण विधियों का विकास
  • टाटा स्‍टील, नीदरलैंड वैद्युत कण-संचलन निक्षेपण द्वारा इस्‍पात पर बहुलक विलेपन
  • टोकयो विश्‍वविद्यालय, जापान, जल के प्रकाशिक अपघटन के लिए परतदार पदार्थों का विकास
  • कार्डिफ विश्‍वविद्यालय, यू के, उपापचयन उत्‍प्रेरक के रूप में नैनो-वेनाडियम का डिजाइन एवं विकास
  • रशियन फाउण्‍डेशन फार बेसिक रिसर्च, मास्‍को प्रतिबल के अंतर्गत मिश्र - धातुओं का यांत्रिक आचरण


  • प्र‍तिरूपण और खनिजों एवं पदार्थों के संसाधन का अनुकार, खर्चीले वास्‍तविक जगत के परीक्षणों की आवश्‍यकता के बिना, लागत प्रभावकारी संयंत्र डिजाइनों और उन्‍नत प्रचालन अवस्‍थाओं की ओर प्रेरित करते हैं । आइएमएमटी प्रवाह आचरण के अध्‍ययन और प्रचालन अवस्‍थाओं के इष्‍टतमीकरण के लिए संगणनात्‍मक द्रव गतिकी और विभिन्‍न खनिज एवं पदार्थ संसाधन इकाइयों के प्रचालनों के लिए पृथक् तत्‍त्‍व के प्रतिरूपो पर कार्य कर रहा है । भविष्‍य में औद्योगिक प्रक्रम एवं डिजाइन संबंधी समस्‍याओं के निराकरण के लिए आइएमएमटी 12वीं योजना अवधि के लिए एक 128 संसाधक आधारित उच्‍च निष्‍पादन संगणनक खरीदने की योजना बना रही है।

    सीएसआइआर हमारी क्षमता का आधार स्‍तम्‍भ है और 11 वीं योजना अवधि के दौरान हमें सम्‍पूर्ण समर्थन प्रदान किया है। 12 वीं योजना अवधि के लिए, कई नई अनुसंधान एवं विकास योजनाओं पर विचार किया जा रहा है और मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि इनमें से कई योजनाओं को कार्यान्‍वित किया जा सकता है । हाइड्रोजन प्‍लाज्‍मा का उपयोग करके कार्बन रहित लोहे का उत्‍पादन, अकोकाकारी कोयले को कोककारी कोयले में परिवर्तन, हरित रसायन का उपयोग करके खनिज पृथक्‍करण के लिए रसायनों का संश्‍लेषण, भारत के खनिज संसाधन मानचित्र का विकास, इस अंचल के औद्योगिक क्षेत्र के एरोसोल एवं जल की गुणवत्‍ता का मानचित्रण और अपशिष्‍ट को सम्‍पदा में परिवर्तन आदि हमारे नए विचारों में शामिल हैं। हमारे वैज्ञानिक इन विचारों पर कार्य करने को तत्‍पर हैं और उनको उपयोग में लाएंगे जो मेरे विचार से न केवल प्राकृतिक सम्‍पदाओं के प्रभावकारी उपयोग में बल्कि हमारे देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में भी सहायक होंगे ।

    पिछलों वर्षों की तुलना में हमने इस वर्ष 24 करोड़ रुपये की सर्वाधिक बाह्य नगदी प्रवाह (ई सी एफ) प्राप्‍त किया और 110 एससीआइ शोध पत्रों को प्रकाशित करके प्रकाशन एवं पैटेण्‍टों में सर्वोच्‍च रिकार्ड दर्ज किया । पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों के औसत इम्‍पैक्‍ट फैक्‍टर में भी वृद्धि हुई है और पिछले वर्ष की औसत 1.713 की तुलना में इस वर्ष की औसत बढ़कर 2.306 हो गई है। हमारे कार्य निष्‍पादन में इस तरह की क्रांतिकारी उन्‍नति प्रथमत: हमारे औद्योगिक साझेदारें के निरंतर प्रोत्‍साहन के कारण एवं अत्‍यधिक प्रभावकारी ढंग से अनुप्रयुक्‍त एवं मौलिक अनुसंधान में हमारे नवीकृत प्रतिबद्धता के कारण संभव हो सका ।

    आइएमएमटी ने परिपक्‍वता हासिल कर ली है। अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में हमारी सफलता को इस ऊँचाई तक पहुँचाने के लिए हमारे वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाने का एक प्रमाणपत्र है। इस उपलब्घि के लिए मैं संस्‍थान के प्रत्‍येक सदस्‍य को बधाई देता हूँ । अभूतपूर्व ढंग से इस स्‍तर तक आइएमएमटी का विकास इसलिए संभव हो सका क्‍योंकि हमने गुणवत्‍तापूर्ण कार्य और निरंतर सुधार के लिए संचेतना की अभिवृद्धि हेतु कार्य संस्‍कृति में पविर्तन किया है । मैं आशा करता हूँ कि संस्‍थान के प्रत्‍येक सदस्‍य सर्वदा इस संस्‍कृति को अंगीकार करके आगामी वर्षों में आएमएमटी की सफलता को सुनिश्चित करेंगे ।

    जय हिन्‍द